facebook Share on Facebook पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया गया और इस दिन भारत भर में बिगड़ रहे पर्यावरण पर जहां गहन चिंतन किया गया, वहीं आम जन मानस व विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कई प्रकार के पौधे रोपे गए, ताकि हमारा पर्यावरण और स्वच्छ हो सके। जिस तरह से कोरोना की इस कथित दूसरी लहर के दौरान संक्रमित लोगों को एक एक सांस के लिए तड़पना पड़ा और सिलेंडरों की बेहद कमी पाई गई, उससे यह अत्यंत जरूरी हो जाता है कि हम अपने पर्यावरण के प्रति जागरुक हो जाएं। हिंदुस्तान की जनता को यह समझना होगा कि यदि वातावरण शुद्ध होगा, तो हमारा शरीर भी बीमारियों से बचा रहेगा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि हर आदमी को अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। आज जिस तरह से उद्योगों द्वारा प्रदूषित गैसों का विसर्जन किया जा रहा है, उससे मानव जीवन पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। अद्योगों से निकलने वाला गंदा पानी हमारे पेयजल स्त्रोतों में जाकर मिल रहा है और इसका सेवन करने से लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। इसके साथ ही लगातार बढ़ रहा कूड़ा कचरा भी वातावरण का प्रदूषित करता जा रहा है। लोग जहां तहां कचरा फेंकने से गुरेज नहीं करते हैं और इसका नतीजा यह होता है कि इस कचरे से कई प्रकार की गंध निकलती है, जो आम आदमी को बीमार करने के लिए काफी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हमेशा इस बात पर जोर देते रहे हैं कि हमें अपने देश को यदि रोग मुक्त बनाना है, तो सबसे पहले हमें वातावरण की शुद्धि की ओर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाने चाहिए। यह सुखद कहा जा सकता है कि भारत की कई सामाजिक संस्थाएं समय समय पर बिगड़ते पर्यावरण पर चिंतन करती रहती हैं और पेड़ लगाने के अभियान पर काम करती हैं। यह भी दीगर है कि आज आम आदमी को होने वाले कई रोगों का कारण प्रदूषित वातावरण है और साथ ही शुद्ध हवा का न होना भी कई जटिल रोगों को जन्म दे रहा है। देश के बड़े शहरों के मुकाबले गांवों के लोगों का स्वास्थ्य काफी अच्छा है और इसका कारण गांवों में मिलने वाली प्रदूषण रहित शुद्ध हवा तथा पीने का साफ पानी ही कहा जा सकता है। कोरोना काल में हमें वातावरण की शुद्धता का बखूबी अहसास हुआ है। इस दौरान कोरोना से संक्रमित मरीजों का जब ऑक्सीजन लेवल काफी लो चला गया, तो पता चला कि जीवन के लिए हवा कितनी अहम होती है और इसके लिए प्रकृति से बड़ंी कोई चीज नहीं है। अत: अब हमें इस बात को समझना ही होगा कि शुद्ध वातावरण के लिए हमें अपने पर्यावरण को शुद्ध रखना होगा। आज वन माफिया अपने फायदे के लिए जंगलों को काटता जा रहा है। यदि इसी रफ्तार से वनों का कटान होता रहा, तो एक दिन पेड़ों का अस्तित्व ही ख्त्म हो जाएगा और तब मानव जीवन का क्या हाल होगा, यह अनुमान लगाया जा सकता है। यह भी सही है कि आज सामने आ रही सभी प्रकार की महामारियां या अन्य कहर प्रकृति से छेड़छाड़ का ही नतीजा है। यदि प्रकृति को छेड़ा जाएगा, तो इसका परिणाम तो भुगतना ही पड़ेगा। हमें वास्तव में अभी भी समय रहते संभलना होगा कि हम इस लगातार बिगड़ रहे वातावरण को बचाने के लिए आगे आएं। हमें केवल पर्यावरण दिवस को मनाने के लिए आयोजन ही नहीं करने चाहिए, बल्कि पेड़ों की तादाद को भी बढ़ाना चाहिए, ताकि आने वाले समय में समूचे विश्व में हरियाली ही हरियाली बिखर सके।