facebook Share on Facebook प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में दो बड़े ऐलान किए हैं। पहला कि अब केंद्र की ओर से सभी 18 वर्ष से ऊपर वालों को कोरोना की वैक्सीन सभी राज्यों को मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाएगी। वहीं, पीएम ने दूसरे ऐलान में देश कें करीब 80 करोड़ गरीब लोगों को आगामी दीपावली तक मुफ्त अनाज दिया जाएग। केंद्र की ओर से मुफ्त अनाज देने का ऐलान केवल दो माह तक देने को ही निर्णय लिया गया था, मगर अब इस स्कीम को बढ़ाते हुए इसे हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व दिवाली तक कर दिया गया है। संभवत: प्रधानमंत्री ने वैक्सीन को लेकर जो घोषणा की है, वह कुछ राज्यों में वैक्सीन को लेकर सामने आ रही घोटालेबाजी की खबरों और वैक्सीन आपूर्ति की कमी के समाचारों के उछलने के मद्देनजर ही की है। पंजाब में वैक्सीन पर घपलेबाजी के आरोप सामने आए हैं और इस पर काफी होहल्ला भी किया गया है। वास्तव में वैक्सीनेशन कार्य में जिस तरह से काम किया जा रहा है, वह अपने आप में काबिलेतारीफ कहा जा सकता है, लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि विपक्षी दलों द्वारा इसमें कई तरह की बाधाएं उत्पन्न करने की कोशिशें भी की जा रही हैं। इस समय देश कोरोना की कथित दूसरी लहर से गुजर रहा है और सुखद पहलु यह कहा जा सकता है कि अब धीरे धीरे देश भर में कोरोना के मामलों में कमी दर्ज की जा रही है। देश के कई राज्यों में अब कोरोना कफ्र्यू में भी ढील दी जा रही है। फिर भी यह दीगर है कि कोरोना से बचाव में वैक्सीन ही एक बड़ा हथियार हमारे पास है और जब तक भारत के हर नागरिक को वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक कोविड-19 का खौफ बना ही रहेगा। वैक्सीन पर सियासत या किसी तरह की घपलेबाजी करना उचित नहीं कहा जा सकता है। यह एक ऐसा अभियान है, जिसे वास्तव में जन सहयोग की आवश्यकता है। जब तक आम आदमी इसकी कामयाबी के लिए अपने कदम नहीं बढ़ाता है, तब तक इसे सफल नहीं बनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री को आखिर वैक्सीन पर इस तरह का ऐलान क्यां करना पड़ा, क्योंकि वैक्सीन पर सियासत करने वालों के कदम बढ़ते ही जा रहे थे। वहीं, देश के 80 करोड़ गरीबों को दिवाली तक मुफ्त अनाज देने के ऐलान के मायने भी यही हो सकते हैं कि कोरोना से हाहत हो रहे लोगों को कुछ तो सहारा मिल सके। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राज्य में हर घर राशन उपलब्ध करवाने की बात कही थी और उन्होंने केंद्र सरकार से इस बाबत ांपर्क भी किया था, मगर केंद्र ने इसे सिरे से नकार दिया है। सरकार की ओर से आम आदमी के हितार्थ यदि कुछ अच्छे कदम उठाए जाते हैं, तो उनका सहर्ष स्वागत किया जाना चाहिए। इस समय देश जिस विकट दौर से गुजर रहा है, उसकी वास्तविकता को भी सियासतदानों एवं आम आदमी को समझना चाहिए। बीते दिनों यह भी समाचार सामने आए हैं कि वैक्सीन काफी तादाद में इस्तेमाल नहीं की गई है और यह बर्बाद हो गई। जिन राज्यों में इस तरह की बर्बादी हुई है, उन्हेें आने वाले समय में इस बारे अलर्ट होना चाहिए। वैक्सीन का एक एक डोज जीवन दायक है और इसकी बर्बादी करना किसी भी सूरत में सही नहीं कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री की घोषणाओं के मायने अपने आप में काफी अहमियत रखते हैं।

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