facebook Share on Facebook देश में कोरोना की कथित दूसरी लहर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। इस लहर में रोजाना आने वाले मामलों में कमी जरूर दर्ज की जा रही है, जोकि आम आदमी और सरकारों के लिए सुखद कहा जा सकता है। फिर भी यह कह देना कि खतरा टल चुका है, अभी जल्दबाजी होगी। इसी बीच कोविड की तीसरी लहर की चर्चाओं ने भी जोर पकडऩा शुरु कर दिया है। दूसरी लहर जब पीक पर थी, तभी कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंकाएं जताई जाने लगी थी और यह कहा जा रहा था कि यदि वास्तव में इस तरह की कोई लहर देश में आती है, तो यह बच्चों को प्रभावित करेगी। हालांकि इस बारे एक्सपट्र्स की अलग अलग राय है। कोई कहता है कि इस लहर से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, जबकि कुछ एक्सपट्र्स ने इससे बचने की सलाह दी है। अब सरकार की ओर से भी इस संभावित तीसरी लहर से सावधान रहने का आह्वान किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी देशवासियों से अलर्ट रहने को कहा है। प्रधानमंत्री का कहना है कि वायरस अब भी हमारे बीच मौजूद है और उसके म्यूटेशन की संभावना भी बनी हुई है। पीएम ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर ने बता दिया है कि वायरस कैसी कैसी चुनौतियां दे सकता है। देश को हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें विज्ञान, सरकार, समाज, संस्था या व्यक्ति के स्तर पर अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। प्रधानमंत्री का कोरोना पर गहन चिंता करना वाजिब ही है, क्योंकि जिस तरह से पिछले लगभग डेढ़ वर्षों से इस वैश्विक महामारी ने अपना प्रकोप जारी रखा हुआ है, उससे अब हर आदमी टूटता हुआ नजर आ रहा है। यह भी सही है कि सरकार के पास जादू की कोई ऐसी छड़ी नहीं है, जिसे घूमाकर इस महामारी को छूमंतर किया जा सके। सरकार तो केवल नियमों का सही ढंग से पालन करने और समय पर वैक्सीन लगवाने की ही बात कर सकती है। अब यह तो प्रत्येक आदमी का ही फर्ज बनता है कि वह खुद को इस बीमारी से कितना बचा पाता है और नियमों का कितना पालन कर रहा है। गौरतलब है कि दूसरी लहर के बीच अब कुछ कम सामने आ रहे मामलों के मद्देनजर प्रतिबंधों में काफी रियायतें आम आदमी को दी गई हैं। ऐसे में यदि फिर से पिछली लापरवाहियों को दोहराया जाता है, तो परिणाम सचमुच ही गंभीर होंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बाजारों में नियमों के उल्लंघन पर कड़ा संज्ञान लेते हुए चिंता जाहिर की है और चेताया है कि ऐसी लापरवाहियों से तो तीसरी लहर के जल्द आने की संभावना नजर आ रही है। कोर्ट का यह भी कहना है कि किसी को भी लापरवाही की इजाजत नहीं दी जा सकती है। बाजारों में वास्तव में अपार भीड़ नजर आ रही है और लोग नियमों का पालन करने को भी दरकिनार करते जा रहे हैं। हमने इस महामारी की दो लहरों का सामना किया है और अब हमारे पास इससे लडऩे का अच्छा खासा अनुभव भी हो चुका है। ऐसे में यदि अब भी हम इस महामारी के प्रति लापरवाही दिखाते हैं, तो यह हमारी सबसे बड़ी भूल कही जा सकती है। हर आदमी को प्रधानमंत्री और अदालत की चिंताओं को समझना होगा। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को हम नियमों का सही ढंग से पालन करने से रोक सकते हैं और ऐसा करने से न केवल हम खुद को बचा सकते हैं, बल्कि अपने परिवार को भी एक सुरक्षात्मक माहौल दे सकते हैं।