facebook Share on Facebook हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को लेकर एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस केंद्र शासित प्रदेश के हर पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक में कई कश्मीरी नेताओं ने शमूलियत की। बैठक में फारुख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद, कविंदर गुप्ता, निर्मल सिंह, रविंद्र रैना और सज्जाद लोन समेत 14 नेता शामिल हुए। सबसे अहम यही रहा कि सभी नेताओं ने लगभग एक ही विषय पर फोकस सखा और वह था कि जम्मू कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया जाए। इन नेताओं को तर्क था कि जम्मू कश्मीर को जब तक पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता, तब तक इसका विकास होना संभव नहीं है। इसके साथ ही इस केंद्र शासित प्रदेश का युवा वर्ग भी खुद को कुंठित महसूस कर रहा है और आम जन मानस के विश्वास बहाली के लिए यह किया जाना बेहद आवश्यक है। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 के खत्म होने के लगभग 2 साल के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इसके अतिरिक्त इन सभी नेताओं ने जम्मू कश्मीर में चुनाव करवाने की भी मांग उठाई। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली पर जोर देते हुए वहां के नेताओं से कहा कि परिसीमन का काम समाप्त होते ही पूर्ववर्ती राज्य में विधानसभा चुनाव अवश्य करवाए जाएंगे। इस बैठक में धारा 370 का मसला भी जरूर उठा, लेकिन क्योंकि यह मामला कोर्ट में है, इसलिए इस पर ज्यादा बातचीत नहीं हो पाई। गौरतलब है कि पांच अगस्त, 2019 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। जम्मू कश्मीर को विकसित और प्रगतिशील प्रदेश के रूप में विकसित करने के लिए जारी प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता जम्मू कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है और इसी के मद्देनजर प्रयास भी किए जा रहे हैं। बैठक के दौरान लोकसभा सदस्य अब्दुल्ला ने कहा कि वास्तव में जम्मू कश्मीर में विश्वास की कमी महसूस की जा रही है और उसे तुरंत बहाल करने की जरूरत है और उसके लिए केंद्र को जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की दिशा में काम करना चाहिए। यह भी सही है कि आज जम्मू कश्मीर के लोग समाज की मुख्यधारा की ओर निहार रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से लगातार आतंकवाद के प्रहार किए जा रहे हैं, जिससे इस खूबसूरत केंद्र शासित प्रदेश में काफी असर पड़ा है। इस प्रदेश के लोग दूसरों की मेहमाननवाजी के लिए जाने जाते हैं और यहां के खूबसूरत पर्यटन स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलते ही काफी कुछ बदलेगा। पिछले लगभग दो सालों में पहली बार जम्मू कश्मीर के राजनीतिक नेतृत्व के साथ वार्ता का हाथ बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस केंद्रशासित प्रदेश के भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए यह बैठक बुलाई थी, जिसके परिणाम काफी हद तक सार्थक कहे जा सकते हैं। यह भी दीगर है कि सात महीने पहले ही इस केंद्र शासित प्रदेश में जिला विकास परिषद के चुनाव संपन्न हुए थे। इस चुनाव में गुपकर गठबंधन को 280 में से 110 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। गठबंधन के दलों में नेशनल कांफ्रेंस को सबसे अधिक 67 सीटों पर विजय हासिल हुई थी, जबकि 75 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। जम्मू कश्मीर में वर्ष 2018 से राष्ट्रपति शासन लागू है।

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