facebook Share on Facebook देशभर में वैश्विक महामारी कोरोना से जो हालात सामने आए हैं, वह सबके सामने है। कोरोना की कथित दूसरी लहर ने अपना कहर इस कदर बरपाया कि हर आदमी के दिल में खौफ पैदा कर दिया। धीेरे धीरे इस लहर का असर कम होने लगा और सरकार ने भी लगाए गए प्रतिबंधों में रियायत देना शुरु कर दिया। यह दीगर है कि आम जनता तो बस इसी के इंतजार में थी कि सरकार कब लगाए गए प्रतिबंधों को हटाए और कब वह फिर से अपनी मनमानियों भरी जिंदगी को जीना शुरु कर दें। मौजूदा वक्त में यही सब देखने को मिल रहा है। वास्तव में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सामने आ रही नई चेतावनियों के बाद तो माथे पर चिंता की लकीरें खिंचना स्वाभाविक ही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि तीसरी लहर करीब तीन महीने बाद आ सकती है, लेकिन जिस तरह से लोग लापरवाह और बेफिक्र होकर कोरोना से बचाव के तमाम नियम-कायदे भूल गए हैं और प्रशासन की नाक तले मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की खुलकर धज्जियां उड़ रही हैं। ऐसे में तो यही कहा जा सकता है कि कोरोना की तीसरी लहर बहुत जल्दी दस्तक दे सकती है। जगह-जगह लॉकडाउन खुलते ही बाजारों में उमड़ती भारी भीड़ तथा हर कहीं कोरोना प्रोटोकॉल के टूटते नियमों को देखते हुए कोरोना की अगली लहर को लेकर चिंताएं बढऩे लगी हैं। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने तो इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए इन हालात पर गहरी चिंता जताते हुए यह कहा भी है कि अगर यूं ही सब चलता रहा, तो कोरोना की तीसरी लहर को बढ़ावा मिलेगा और फिर भगवान ही हमें बचा पाएगा। अभी तक इस महामारी से बचने का केवल नियमों का सही ढंग से पालन करना ही एक मात्र उपाय है और इसके साथ ही हर आदमी का वैक्सीनेशन किया जाना भी बेहद जरूरी है, जिस पर इन दिनों सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है। इस समय इजरायल स्वयं को कोविड मुक्त घोषित करने वाला दुनिया का पहला ऐसा देश बन चुका है, जहां 70 फीसदी से ज्यादा आबादी का वैक्सीनेशन किए जाने के बाद सरकार द्वारा फेस मास्क लगाने के अनिवार्य नियम को हटा दिया गया है, जबकि भारत में अभी शत प्रतिशत वैैक्सीनेशन के आंकड़े को छू पाना अभी दिल्ली दूर है, वाली स्थिति कही जा सकती है। देश में लोग वैक्सीन लगवाने को प्राथमिकता तो दे रहे हैं, लेकिन अभी भी कई ऐसे भी लोग हैं, जो वैक्सीन को लेकर भ्रमित हैं। उनके भ्रम को दूर कर उन्हें वैक्सीन की अनिवार्यता से अवगत करवाया जाना चाहिए, ताकि वे आगे चलकर कुछ और लोगों को जागरुक कर सकें। कोरोना को अभी हल्के में लेने की भूल नहीं की जानी चाहिए। जिस तरह से वैज्ञानिकों की ओर से संभावित कोरोना की तीसरी लहर को लेकर भविष्यवाणियां की जा रही हैं, उनके मायनों का नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का भी यही कहना है कि पहली लहर के बाद हमने जो गलतियां की हैं, वही गलती हमसे फिर न हो जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि खतरा अभी टला नहीं है, क्योंकि कोरोना वायरस अभी देश में मौजूद है और इसके रूप बदलने की संभावना बनी हुई है, इसलिए तमाम सावधानियां बरती जानी चाहिए। उनका कहना है कि दूसरी लहर ने देश में बहुत कहर बरपाया है और कई परिवारों ने इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। इसलिए लोगों को कोई ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए, जिसका बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ जाए।

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