facebook Share on Facebook भारत का अति महत्वकांक्षी राज्य जम्मू कश्मीर पिछले लंबे समय से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। मौजूदा समय में लगभग रोज ही आतंकवादियों द्वारा गोलाबारी कर इस केंद्र शासित प्रदेश का माहौल बिगाडऩे की कोशिशें की जा रही हैं। शनिवार 10 जुलाई को भी जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले के रानीपोरा इलाके में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद दक्षिण कश्मीर जिले के रानीपुरा इलाके के क्वारीगाम में घेराबंदी और तलाश अभियान शुरु किया। इस दौैरान इलाके में तलाशी के दौरान आतंकवादियों ने उन पर गोली चला दी। बलों ने इस पर जवाबी कार्रवाई की, जिससे मुठभेड़ शुरु हो गई और दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। असल में भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से लगातार की जा रही इस गोलाबारी से अब इस प्रदेश के लोग भी उक्ता गए हैं। भारत के कश्मीरियों को ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कश्मीरियों को भी पता चल चुका है कि अब कश्मीर को पुरानी चाल पर चलाना असंभव है। कई इस्लामी देशों ने भी इसे भारत का आंतरिक मामला बता दिया है। केवल पाक के सियासतदान ही इस राग का अलाप कर रहे हैं। यह भी दीगर है कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत से दोनों देशों के मुतल्लिक हर वार्तालाप में इसी कश्मारी राग को छेड़ा है, जिसके चलते बातचीत कभी सफल नहीं हो सकी है। जम्मू कश्मीर के लोग अब राज्य में विधानसभा चुनाव करवाने की मांग कर रहे हैं और कई आम कश्मीरी नेता यह भी मांग कर रहे हैं कि कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा चुनाव के पहले ही दे दिया जाए। बीते 24 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कश्मीरी नेताओं की एक बैठक हुई है, जिसमें जम्मू कश्मीर से जुड़े कई अहम मसलों पर चर्चा की गई। सबसे अहम यही रहा कि सभी नेताओं ने एक सुर में यही मांग उठाई कि जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए, ताकि वहां पर विकास की गति को आगे बढ़ाया जा सके। इस सर्वदलीय बैठक की खासियत यह रही कि पूरी बैठक के दौरान माहौल बिलकुल शांत बना रहा तथा सभी की बात को दृढ़ता से सुना गया। हालांकि सरकार ने उस बैठक में साफ साफ कह दिया था कि वह जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा फिर से बरकरार करेगी और जल्द ही वहां विधानसभा चुनाव भी करवाए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर में जहां विधानसभा चुनाव करवाने के साथ इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किए जाने की आवश्यकता है, वहीं प्रदेश के आम जन मानस में विश्वास बहाली की भी जरूरत है। जम्मू कश्मीर के सभी सियासी दलों ने जिस तरह से प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में अपना सहयोग दिखाया है, उसी तरह से राज्य के विकास में भी अपना सहयोग करना चाहिए। राजनीतिक द्वेष भावना से यह सब करना संभव नहीं है। यह भी दीगर है कि बंदूकों की नोक पर कभी भी शांति की कामना नहीं की जा सकती है। पाकिस्तान कभी भी भारत का हित नहीं चाहेगा। उसका मकसद आतंकवाद की आड़ में हिंदुस्तान की नौजवान पीढ़ी को उसकी राह से भटकाना है और इसका उदाहरण कश्मीर में नजर आ रहा है। कई कश्मीरी युवा अब यह समझने लगे हैं कि आतंकवाद का रास्ता बर्बादी के सिवा और कुछ नहीं है। यदि वास्तव में जम्मू कश्मीर को तरक्की की राह पर ले जाना है, तो यहां की अवाम की आम से आम बातों को गंभीरता से समझना होगा। जम्मू कश्मीर में पूर्ण राज्य की बहाली के लिए सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए, ताकि यहां जल्द ही विधानसभा के चुनाव भी करवाए जा सकें और आम जनता देश के विकास की भागीदार बन सके।