facebook Share on Facebook हाल ही में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया और इसमें कई नए चेहरों को शामिल कर एक उम्मीद की किरण जगाई गई है, वहीं काम न करने वाले मंत्रियों को एक संदेश भी इसके जरिए दिया गया है। इस बार कई दिग्गजों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। जिस तरह से कई दिग्गज भाजपा नेताओं से इस्तीफे लेकर नए लोगों को मौके दिए गए हैं, उससे मंत्रिमंडल विस्तार को मंत्रिमंडल सुधार कहा जाए, तो यह कहना गलत न होगा। पांच राज्यों में आगामी चुनावों को देखते हुए तमाम राजनीतिक समीकरणों को साधने का लक्ष्य भी इस मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने इसके जरिए यह संदेश देने की भी कोशिश की है कि जो मंत्री अपेक्षा अनुरूप कार्य नहीं करेगा, उसे तुरंत हटा दिया जाएगा। यह मंत्रिमंडल शायद आजाद भारत के इतिहास में अब तक का सबसे युवा और पढ़े लिखे नेताओं का मंत्रिमंडल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वित्त, विदेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय महिलाओं के हाथ में देकर पहले भी महिलाओं के प्रति अपना विश्वास व्यक्त कर चुके हैं और इस बार भी उन्होंने सात मंत्रालय महिलाओं के हाथों में सौंपे हैं। अब कुल 11 महिलाएं वर्तमान सरकार में मंत्री हैं, जो महिलाओं के प्रति बदलते दृष्टिकोण का ही प्रतीक कहा जा सकता है। है। इस मंत्रिमंडल विस्तार के द्वारा प्रधानमंत्री ने यह संदेश देने की भी कोशिश की है कि वह महिला सशक्तिकरण की केवल बातें ही नहीं करते, बल्कि इस दिशा में ठोस कदम भी उठाते हैं। एनडीए के घटक दलों, जनता दल युनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी और अपना दल को भी इस मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल करके भाजपा ने एनडीए को भी मजबूती प्रदान की है। इस मंत्रिमंडल के विस्तारीकरण के जरिए युवा तथा अनुभवी लोगों को मौका देकर उनकी प्रतिभा का मूल्यांकन करना है। नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल में ऐसे युवा चेहरों को शामिल किया है, जो कुछ बेहतर करने का माद्दा रखते हैं। पूर्व केंद्रीय वित्त और कार्पोरेट मालों के राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर पर भरोसा जताते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त खेल मंत्रालय की भी जिम्मदारी सौंपी है अज्ञैर उन्हें स्वतंत्र रूप से कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसके सीधे से मायने कहे जा सकते हैं कि प्रधानमंत्री को अनुराग ठाकुर पर पूरा भरोसा है कि वह आगे और बेहतर करेंगे। वास्तव में प्रधानमंत्री केवल उन लोगों पर विश्वास करते हैं, जो परिश्रम की कसौटी पर खरे उतरते हैं। उनकी कठोर कार्यशैली और लक्ष्य पर नजर ही उनकी सफलता का राज है। यही कारण है कि आज विश्व भर के अधिकांश देश उनकी कार्यशैली के मुरीद हैं। इस बार मंत्रिमंडल से बाहर किए गए कुछ दिग्गज भाजपा नेताओं ने भले ही दिल में इस बात को लेकर मलाल रहा हो, मगर वे इस पर कर कुछ नहीं सकते हैं। अपनी सुस्त कार्यप्रणाली के चलते ही उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर होना पड़ा है। रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर जैसे हाई प्रोफाइल मंत्रियों को दरकिनार करना यही दर्शाता है कि नरेंद्र मोदी धरातल स्तर पर काम चाहते हैं। दोनों ही मंत्रियों के मामले में प्रदर्शन की कमी रही है, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है। इसी तरह से शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी निम्र स्तर के नजर आए। छात्र समुदाय में उपजे आक्रोश को वह समझने में नाकाम रहे। इसके साथ ही वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में नए नवाचार लाने में भी पूर्णतया नाकामयाब रहे हैं। उक्त सभी मंत्रियों के काम में दिखावा ज्यादा और काम शून्य ही नजर आया। यह दीगर है कि नरेंद्र मोदी शांत रहकर अपने मंत्रालयों से उत्कृष्ठ कार्य चाहते हैं। अब जबकि मंत्रिमंडल में युवा और नए मंत्रियों को शामिल किया गया है, तो प्रधानमंत्री को उनसे यही अपेक्षा रहेगी कि सभी बेहतर कार्य कर उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।

more news....