facebook Share on Facebook पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी होते ही नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना सियासी दमखम दिखाना शुरु कर दिया है। नियुक्ति के दो दिन के बाद ही सिद्धू के घर पार्टी विधायकों का जमावड़ा नजर आया। नवजोत सिंह सिद्धू ने बुधवार को अमृतसर में अपने आवास पर लगभग 62 पार्टी विधायकों के साथ नाश्ते पर बैठक की। गौरतलब है कि नवजोत सिंह सिद्धू को हाल ही में पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने एक दिन बाद ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाने वाले पार्टी नेताओं से मुलाकात की और अभी तक वह लगातार नेताओं से मिल रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह सिद्धू से नाराज चल रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक नवजोत सिंह सिद्धू उनसे सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांग लेते हैं, तब तक वह उनसे किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेंगे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के ही विधायक प्रताप सिंह ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को आखिर सीएम से किस लिए माफी मांगनी चाहिए। उनका कहना है कि यह कोई सार्वजनिक मुद्दा नहीं है। विधायक प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने कई मुद्दों का समाधान नहीं किया है। ऐसे में उन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए। दोनों नेताओं के बीच इस टकराव ने पार्टी नेताओं की चिंता बढ़ा दी है और पंजाब की सियासत को एक नई दिशा की ओर मोड़ दिया है। दोनों नेताओं के बीच तालमेल का अभाव इसी तरह से रहा, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सियासी रणनीतिकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू के बीच तालमेल का होना बेहद जरूरी है। दीगर है कि करीब दो महीने की सियासी उठापटक के बाद पार्टी आलाकमान ने सिद्धू और कैप्टन के बीच चल रही तनातनी को खत्म करने का रास्ता निकाला है, मगर बात बनती नहीं दिख रही है। कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही चार कार्यकारी अध्यक्षों की भी नियुक्ति की है। सोनिया गांधी ने जिन चार नेताओं को पंजाब कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है, उनमें संगत सिंह गिलाजियान, सुखविंदर सिंह डैनी, पवन गोयल और कुलजीत सिंह नागरा का नाम शामिल है। आलाकमान ने पंजाब में चार अध्यक्ष बनाकर वास्तव में एक तीर से कई निशाने साधने का काम किया है। इधर, पंजाब के मंत्री तृप्त राजिंद्र सिंह बाजवा ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को सलाह दी है कि जैसे वे प्रताप सिंह बाजवा की लिखी चि_ियां भूल गए हैं, वैसे ही नवजोत सिंह सिद्धू के विरोधी ट्वीट भी भूल जाएं। कैप्टन राजा हैं और बड़े दिल के मालिक हैं। कांग्रेस के भले के लिए कैप्टन को सिद्धू की माफी का इंतजार करने की बजाय विरोधी ट्वीट को भूल जाना चाहिए। यह भी अहम है कि पंजाब में कैप्टन ने हमेशा वन मैन आर्मी की तरह काम किया है। आज तक किसी भी प्रधान के साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं रहे। पीपीसीसी प्रधान जाखड़ को एक बार सीएम हाउस में जाकर अफसरशाही से जलील होना पड़ा था। कैप्टन से मिलने के लिए जाखड़ को जहां इंतजार करना पड़ा, वहीं अधिकारियों ने उनके मोबाइल तक निकलवा लिए। पंजाब में टिकट वितरण हो या फिर उपचुनाव कैप्टन ने कांग्रेस के नेताओं की कभी नहीं सुनी। हाईकमान को आंखें दिखाकर पंजाब में कैप्टन कांग्रेस चलाने वाले अमरिंदर सिंह को आलाकमान ने झटका देकर जता दिया है कि अब पंजाब में कैप्टन कांग्रेस नहीं, बल्कि इंडियन नेशनल कांग्रेस चलेगी। कैप्टन अपने घर में ही काफी कमजोर हो चुके थे। उनकी अफसरशाही से जलील होने वाले नाराज करीबी मंत्रियों व विधायकों ने ही दिल्ली में रोना रोया और तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट कैप्टन के खिलाफ गई। जो भी हो, पंजाब में कैप्टन और सिद्धू की इस खींचातानी से आने वाले विधानसभा चुनावों में काफी असर पड़ सकता है, जोकि पार्टी की लगातार गिर रही छवि के लिए अच्छा नहीं है।

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