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AJIT NEHRIYA

DHARAMSALA | SUNNY MAHAJAN 

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अजीत नैहरिया ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी केवल भारतीय जनता पार्टी के ही प्रधानमंत्री नहीं वल्कि सभी देशवासियों के प्रधानमंत्री हैं और देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा सर्वोपरि है, इस बात में किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए। लेकिन इसके साथ साथ यह भी सच है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक के लिए पंजाब सरकार को दोषी ठहराना  भी उचित नहीं है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा पूर्णतया एस पी जी के पास होता है, अन्य सुरक्षा एजेंसियां और प्रदेश पुलिस इसमें एस पी जी की सहायता करतीं हैं। प्रदेश प्रवक्ता ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर क्या कारण है कि आख़िरी क्षणों में हैलीकॉप्टर की वजाए सड़क मार्ग से भटिंडा एअरपोर्ट से फिरोज पुर जाने का निर्णय लिया गया और यह एक सत्य है कि एक एस पी जी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति की मूवमेंट्स का अंतिम निर्णय केवल और केवल एस पी जी ही लेती है। जब सब कुछ एस पी जी के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होता है तो सुरक्षा में चूक के लिए पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराना कहां तक जायज है। तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना क्या देश की छबी को खराब करने जैसा नहीं है ? प्रधानमंत्री का किसी प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों से यह कहना कि "कह देना अपने मुख्यमंत्री से कि मैं भटिंडा एअरपोर्ट तक जिंदा लौट आया हूं ", बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण कथन है। यह सारा एक राजनैतिक ड्रामा है और यह सारा  ड्रामा अपनी प्रस्तावित राजनैतिक जनसभा में लोगों की अनुपस्थिति के फलस्वरूप रचा गया। पंजाब के लोगों ने भाजपा और भाजपा के नेताओं को पूरी तरह से नकार दिया। प्रधानमंत्री के ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण वक्तव्य से पूरे विश्व में एक संदेश गया कि भारत अराजकता की ओर बढ़ रहा है, और यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और दुखदाई वक्तव्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के बिना ही पाकिस्तान चले जाते हैं और वहां ख़ुद को सुरक्षित महसूस करते हैं और अपने ही एक प्रदेश में असुरक्षित महसूस करते हैं,और वो भी एक ऐसे प्रदेश में जहां के लोगों का इतिहास रहा है कि भारत के आज़ादी के संघर्ष से लेकर आज दिन तक उन लोगों ने अपने खून पसीने से इस देश को सींचने का काम किया है, कितनी हास्यास्पद स्थिति है। पंजाब के लोगों से इतनी नफ़रत क्यूं ? वर्ष 2017 में जब प्रधानमंत्री जी अपने लोक सभा क्षेत्र के दौरे पर थे तो बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की छात्राओं के महिला उत्पीडन के खिलाफ प्रदर्शन के कारण प्रधानमंत्री  को विरोध का सामना करना पड़ा तब तो प्रधानमंत्री जी ने यह नहीं कहा कि " योगी आदित्यनाथ  आप का धन्यवाद कि मैं जिंदा बच कर बाराणसी एअरपोर्ट पहुंच गया", क्यूंकि योगी आदित्यनाथ जी उनके अपने थे। इतना ही नहीं, वर्ष 2018 में जब स्वछता श्रमदान के कार्यक्रम में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहाड़गंज के ट्रैफिक जाम में फंसे तो भाजपा द्वारा तारीफों के पुल बांधे गए कि देखिए एक आम आदमी की तरह प्रधानमंत्री जी लाल बत्ती पर रुके हुए हैं , अगर उस समय दिल्ली के ट्रैफिक जाम में प्रधानमंत्री जी सुरक्षित महसूस कर रहे थे तो अपने ही पंजाब से यह भय क्यूं ? पंजाब जैसे महान राज्य के साथ ऐसा बर्ताव क्यूं ? क्या आप की राजनैतिक रैलियों में भीड़ नहीं आई, इसलिए ? क्या सत्तर हजार कुर्सियों में केवल सात सौ लोग ही थे, इसलिए ? कारण जो भी रहे हों, देश के प्रधानमंत्री द्वारा अपने ही एक प्रदेश के मुख्यमंत्री  और वहां की सुरक्षा एजेंसियों के प्रति ऐसा वक्तव्य दुर्भाग्यपूर्ण है।



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