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डॉक्टर रैना

टीच टू, टू स्टॉप टू थाउजेंट अभियान के अंतर्गत 80 से ज्यादा स्कूलों को तंबाकू मुक्ति ज्ञान की शिक्षा दी गई.

धर्मशाला | सन्नी महाजन 

स्वर्ण जयंती वर्ष भारतीय स्वतंत्रता "75 वें आजादी का अमृत महोत्सव" के एक भाग के रूप में, हिमाचल प्रदेश राज्य में तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रावधानों के कार्यान्वयनकर्ताओं के बीच जागरूकता पैदा करने के प्रयास में, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, डॉ आरपीजीएमसी, टांडा ने हिमाचल प्रदेश में तंबाकू नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र (कैच) ने हिमाचल प्रदेश में कोटपा अधिनियम के तहत शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख/प्रधानाचार्य के लिए राज्य स्तरीय वर्क शॉप 12 जनवरी 2022 को आयोजित की। यह बात डॉ. भानु अवस्थी, प्राचार्य डॉ आरपीजीएमसी ने कही। केंद्र का उद्देश्य डॉ. अवस्थी के अनुसार हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए डब्ल्यूएचओ एफसीटीसी/एमपावर पैकेज के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाना है। 

डॉ सुनील रैना (निदेशक कैच-सह-प्रोफेसर और हेड कम्युनिटी मेडिसिन डॉ आरपीजीएमसी, टांडा) के अनुसार एक एकीकृत बहु-हितधारक दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए, कैच ने एफसीटीसी दिशा निर्देशों के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाकर उप-राष्ट्रीय धूम्रपान मुक्त वातावरण बनाने के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और संसाधन सामग्री के निर्माण के माध्यम से क्षमता को मजबूत करने के लिए निगरानी और मूल्यांकन और कार्यान्वयन अनुसंधान का उपयोग करने की योजना बनाई है।

वर्क शॉप की शुरुआत डॉ. रैना के विशेष संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने राज्य में तंबाकू नियंत्रण नीतियों के कार्यान्वयन के प्रति जागरूकता पैदा करने में कैच की भूमिका और तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थानों को बनाने में संस्थान के प्रमुखों / प्राचार्यों की भूमिका पर प्रकाश डाला। श्री नरेंद्र सिंह जमवाल (प्रिंसिपल, जीएसएसएस, महुनाग। मंडी) ने हिमाचल प्रदेश में अपने स्कूल को पहले तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित करने के अपने अनुभव को साझा किया। डॉ हर्षवर्धन (सहायक प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा विभाग) ने तंबाकू रोकथाम रणनीतियों पर बात की और डॉ साक्षी सुपेहिया (परियोजना समन्वयक, कैच) ने टीओएफईआई दिशानिर्देशों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ ऐश्वर्या (जिला समन्वयक कैच) ने किया। सत्र का समापन डॉ सुनील की समापन टिप्पणी के साथ हुआ।उन्होंने यह भी कहा कि राज्य छात्रों के बीच तंबाकू के उपयोग को कम करने में अच्छा कर रहा है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में न केवल देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल पेश करने की क्षमता है।  वर्कशॉप में प्रदेश के सभी 12 जिलों के 80 से अधिक प्राचार्यों ने भाग लिया।विदित रहे की डॉ सुनील रैना, निदेशक सेंटर फॉर एडवांसिंग टोबैको कंट्रोल के द्वारा बीती हुई  30 दिसंबर अथवा 7 जनवरी को हिमाचल प्रदेश पुलिस के अधिकारियों को तंबाकू से संबंधित कानून कोटपा व हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई तंबाकू संबंधी गाइडलाइन के बारे विस्तृत जानकारी दी गई.



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