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भारतीय नाविक

यूक्रेन में संकट में फंसे 74 भारतीय नाविकों के लिए ढाल बन गए कैप्टन संजय

धर्मशाला  | सन्नी महाजन 

जरूरतमंद लोगों के लिए हर पल मदद को तैयार कैप्टन संजय पराशर ने एक बार फिर युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे भारतीय समुद्री नाविकों के लिए भी बड़ी भूमिका निभाई है। यूक्रेन के माइकोलेइव बंदरगाह में पराशर की प्रबंधन कंपनी के व्यवसायिक जहाज के 21 नाविकों सहित कुल 74 सीफेर्ररस फंसे हुए थे। इन नाविकों को यूक्रेन से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पराशर निरंतर विदेश मंत्रालय व भारतीय दूतावास के सपंर्क में रहे और पल-पल की खबर नाविकों से भी लेते रहे। सोमवार को देर शाम तक सभी नाविक सड़क मार्ग से रोमानिया सीमा पर पहुंच गए। इनमें चार नाविक हिमाचल प्रदेश से भी संबंधित हैं। हालांकि इनकी वतन वापसी में दो से तीन दिन का समय लगेगा। वहीं, कैप्टन संजय ने इन नाविकों के यूक्रेन से सकुशल रोमानिया तक पहुंचाने के लिए विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। 

यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले ही मालवाहक जहाज दक्षिणी यूक्रेन माइकोलेइव बंदरगाह पर पहुंचा था। इस दौरान रूस की सेना ने बमवारी शुरू कर दी और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। इसके साथ अन्य 55 भारतीय नाविक भी इसी जगह पर फंस गए। नाविकों को सुरक्षित वापसी के लिए कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। विडम्बना यह थी कि हमले के बाद सभी नाविक बुरी तरह से सहम गए थे और अगर इनकी वापसी में और ज्यादा समय लगता तो खाने-पीने की भी दिक्कतें हो जातीं। बावजूद ऐन वक्त पर संजय पराशर इन सभी 74 नाविकों को सकंट से बचाने के लिए ढाल बन गए और उन्होंने राेमानिया बार्डर तक पहुंचाने के लिए केन्द्र सरकार व नाविकों के बीच भी सेतु का काम किया। हिमाचल प्रदेश से संबंधित नाविकों कालीबाड़ी मंदिर, पालमपुर के नाविक आंचल मेहता, बड़सर के विनोद, संधोल मंडी के शशि सकलानी और हटवाड़, घुमारवीं के विनोद कुमार ने बताया कि यह घटनाक्रम अचानक हुआ और उन्हें एकबारगी तो यह अहसास नहीं हुआ कि यूक्रेन में चल क्या रहा है।  लेकिन जब तोपों और गोलों की आवाजें नजदीक से सुनाई देने लगीं तो समझ आ गया कि उनकी जान खतरे में है। सुखद बात यह रही कि वे जहाज पर ही इतने दिन तक सुरक्षित रहे। अन्य जहाजों के चालक दल भी उनके संपर्क में रहे और जहाज की उपग्रह संचार प्रणाली आैर इंटरनेट ठीक काम करते रहे। इन नाविकों ने बताया कि इस खतरे के बीच कैप्टन संजय लगातार उनसे जुड़े रहे और दिन-रात हौसला देते रहे। पराशर ने रोमानिया बार्डर लाने के लिए सरकार से भी संपर्क जारी रखा और आज वे शाम को यूक्रेन से सुरक्षित बाहर निकल आए हैं।  नाविकों ने पराशर की तारीफ करते हुए कहा कि सच में कैप्टन संजय समंदर के मसीहा हैं। वहीं, संजय पराशर ने कहा कि वह भारतीय नाविकों को सुरक्षित लाने के लिए सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देते हैं। पीएम मोदी की विदेश नीति के कारण ही यूक्रेन से हजारों अन्य भारतीयों की भी सुरक्षित वतन वापसी हुई है। वहीं, रोमानिया सीमा पर बस द्वारा पहुंचे नाविकों के साथ तीन सीरिया व दो लेबनान के नागरिक भी शामिल हैं।



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